Tuesday, March 10, 2026

पत्थर की चोट (The Sculptor and the Stone)

 यह कहानी एक ऐसे मूर्तिकार की है, जो हमें सिखाती है कि सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि दृढ़ता (Persistence) से मिलती है।

पत्थर की चोट (The Sculptor and the Stone)

एक बार एक मूर्तिकार (Sculptor) जंगल से गुजर रहा था। उसे एक बहुत ही सुंदर और बड़ा पत्थर दिखा। उसने सोचा, "क्यों न इस पत्थर से भगवान की एक प्रतिमा बनाई जाए?"

उसने अपना छैनी और हथौड़ा निकाला और जैसे ही पत्थर पर पहली चोट मारी, पत्थर से आवाज़ आई— "रुको! मुझे मत मारो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मुझे छोड़ दो!"

मूर्तिकार दयालु था, उसने उस पत्थर को छोड़ दिया और आगे बढ़ गया। थोड़ी दूर जाने पर उसे एक और वैसा ही पत्थर मिला। उसने फिर से औजार उठाए और तराशना शुरू किया। इस पत्थर को भी दर्द हुआ, लेकिन वह चुप रहा

कुछ दिनों की मेहनत के बाद, मूर्तिकार ने उस पत्थर को एक अद्भुत प्रतिमा (Statue) में बदल दिया।


नतीजा (The Result)

गाँव के लोग वहाँ एक मंदिर बना रहे थे और उन्हें एक मूर्ति की जरूरत थी। वे उस प्रतिमा को ले गए और मंदिर में स्थापित कर दिया। अब पूजा के लिए एक और पत्थर की जरूरत थी जिस पर लोग नारियल फोड़ सकें। वे जंगल गए और उसी पहले पत्थर को उठा लाए जिसने दर्द सहने से मना कर दिया था।

अब स्थिति यह थी:

  • पहला पत्थर (जिसने दर्द नहीं सहा): वह मंदिर के बाहर रखा गया, जहाँ हर रोज लोग उस पर जोर से नारियल फोड़ते थे।

  • दूसरा पत्थर (जिसने दर्द सहा): वह मंदिर के अंदर भगवान के रूप में पूजा जा रहा था।


सीख (Moral of the Story)

"अगर आज आप मेहनत के दर्द को नहीं सहेंगे, तो जिंदगी भर दूसरों की 'चोट' सहनी पड़ेगी।"

संघर्ष (Struggle) ही वह चीज़ है जो एक साधारण इंसान को 'खास' बनाती है। यदि आप आज मुश्किलों से भाग रहे हैं, तो आप अपनी चमक खो रहे हैं।

Sunday, February 15, 2026

संघर्ष से सफलता तक

🌱 संघर्ष से सफलता तक

एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन आरव के सपने बहुत बड़े थे। वह हर दिन स्कूल के बाद अपने पिता के साथ खेत में काम करता और रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता।


गाँव के लोग अक्सर उससे कहते,
“इतनी मेहनत का क्या फ़ायदा? बड़े सपने अमीर बच्चों के लिए होते हैं।”


उनकी बातें आरव को चुभती थीं, लेकिन वह हार नहीं मानता। उसे भरोसा था कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

एक दिन जिला स्तर की छात्रवृत्ति परीक्षा की घोषणा हुई। आरव ने ठान लिया कि वह इसे पास करेगा। सीमित साधनों के बावजूद उसने पूरे मन से तैयारी की। कई बार वह थक जाता, निराश होता, लेकिन फिर खुद से कहता—
“अगर आज रुक गया, तो कल कभी आगे नहीं बढ़ पाऊँगा।”


परीक्षा का दिन आया। आरव ने पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। कुछ हफ्तों बाद परिणाम आया—
आरव ने पूरे जिले में पहला स्थान हासिल किया था।


उस दिन गाँव के वही लोग, जो कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, आज गर्व से उसका नाम ले रहे थे। आरव को छात्रवृत्ति मिली और आगे पढ़ने का मौका भी।

आरव ने मुस्कुराकर कहा:


“परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, अगर हौसले मज़बूत हों तो मंज़िल ज़रूर मिलती है।”


सीख:

सपने देखने वालों को रोकने वाली सबसे बड़ी चीज़ डर और दूसरों की राय होती है।
अगर आप खुद पर भरोसा रखते हैं, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।

Friday, February 7, 2025

निर्मला सीतारमण और बजट | Nirmla Sitaraman and Budget

 निर्मला सीतारमण ने बजट के लिए मांगे सुझाव...


सबसे ज्यादा लोगों ने इस्तीफा देने का सुझाव दिया...


😆🤪🤣🤓

Tuesday, December 13, 2022

इंसानियत अभी तक जिंदा है - Prerak Prasang

एक सज्जन रेलवे स्टेशन पर बैठे गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी जूते पॉलिश करने वाला एक लड़का आकर बोला~ ‘‘साहब! बूट पॉलिश ?’’

उसकी दयनीय सूरत देखकर उन्होंने अपने जूते आगे बढ़ा दिये, बोले- ‘‘लो, पर ठीक से चमकाना।’’

लड़के ने काम तो शुरू किया परंतु अन्य पॉलिशवालों की तरह उसमें स्फूर्ति नहीं थी।

वे बोले~ ‘‘कैसे ढीले-ढीले काम करते हो? जल्दी-जल्दी हाथ चलाओ !’’

वह लड़का मौन रहा।

इतने में दूसरा लड़का आया। उसने इस लड़के को तुरंत अलग कर दिया और स्वयं फटाफट काम में जुट गया। पहले वाला गूँगे की तरह एक ओर खड़ा रहा। दूसरे ने जूते चमका दिये।

‘पैसे किसे देने हैं?’ इस पर विचार करते हुए उन्होंने जेब में हाथ डाला। उन्हें लगा कि ‘अब इन दोनों में पैसों के लिए झगड़ा या मारपीट होगी।’ फिर उन्होंने सोचा, ‘जिसने काम किया, उसे ही दाम मिलना चाहिए।’ इसलिए उन्होंने बाद में आनेवाले लड़के को पैसे दे दिये।

उसने पैसे ले तो लिये परंतु पहले वाले लड़के की हथेली पर रख दिये। प्रेम से उसकी पीठ थपथपायी और चल दिया।

वह आदमी विस्मित नेत्रों से देखता रहा। उसने लड़के को तुरंत वापस बुलाया और पूछा~ ‘‘यह क्या चक्कर है?’’

लड़का बोला~ ‘‘साहब! यह तीन महीने पहले चलती ट्रेन से गिर गया था। हाथ-पैर में बहुत चोटें आयी थीं। ईश्वर की कृपा से बेचारा बच गया नहीं तो इसकी वृद्धा माँ और बहनों का क्या होता,बहुत स्वाभिमानी है... भीख नहीं मांग सकता....!’’

फिर थोड़ा रुककर वह बोला ~ ‘‘साहब! यहाँ जूते पॉलिश करनेवालों का हमारा समूह है और उसमें एक देवता जैसे हम सबके प्यारे चाचाजी हैं जिन्हें सब ‘सत्संगी चाचाजी’ कहकर पुकारते हैं। वे सत्संग में जाते हैं और हमें भी सत्संग की बातें बताते रहते हैं। उन्होंने ही ये सुझाव रखा कि ‘साथियो! अब यह पहले की तरह स्फूर्ति से काम नहीं कर सकता तो क्या हुआ???

ईश्वर ने हम सबको अपने साथी के प्रति सक्रिय हित, त्याग-भावना, स्नेह, सहानुभूति और एकत्व का भाव प्रकट करने का एक अवसर दिया है।जैसे पीठ, पेट, चेहरा, हाथ, पैर भिन्न-भिन्न दिखते हुए भी हैं एक ही शरीर के अंग, ऐसे ही हम सभी शरीर से भिन्न-भिन्न दिखाई देते हुए भी हैं एक ही आत्मा! हम सब एक हैं।

स्टेशन पर रहने वाले हम सब साथियों ने मिलकर तय किया कि हम अपनी एक जोड़ी जूते पॉलिश करने की आय प्रतिदिन इसे दिया करेंगे और जरूरत पड़ने पर इसके काम में सहायता भी करेंगे।’’

जूते पॉलिश करनेवालों के दल में आपसी प्रेम, सहयोग, एकता तथा मानवता की ऐसी ऊँचाई देखकर वे सज्जन चकित रह गये औऱ खुशी से उसकी पीठ थपथपाई...औऱ सोंचने लगे शायद इंसानियत अभी तक जिंदा है.....!!

Saturday, December 10, 2022

आज का प्रेरक प्रसंग - मैले कपड़े

आज का प्रेरक प्रसंग - मैले कपड़े 

 अनुयायी के साथ प्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया और उन्हें भला-बुरा कहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे, पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देख अंततः वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया।

उस व्यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आश्चर्य से पुछा, “मास्टर जी आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया और तो और आप मुस्कुराते रहे, क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्ट नहीं पहुंचा ?”

मास्टर जी कुछ नहीं बोले और उसे अपने पीछे आने का इशारा किया।

कुछ देर चलने के बाद वे मास्टर जी के कक्ष तक पहुँच गए। मास्टर जी बोले, “तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभी आया।”

मास्टर जी कुछ देर बाद एक मैले कपड़े को लेकर बाहर आये और उसे अनुयायी को थमाते हुए बोले, “लो अपने कपड़े उतारकर इन्हें धारण कर लो ?”

कपड़ों से अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी और अनुयायी ने उन्हें हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया।

मास्टर जी बोले, “क्या हुआ तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण कर सकते ना ? ठीक इसी तरह मैं भी उस व्यक्ति द्वारा फेंके हुए अपशब्दों को नहीं ग्रहण कर सकता।

*शिक्षा:-*
इतना याद रखो कि यदि तुम किसी के बिना मतलब भला-बुरा कहने पर स्वयं भी क्रोधित हो जाते हो तो इसका अर्थ है कि तुम अपने साफ़-सुथरे वस्त्रों की जगह उसके फेंके फटे-पुराने मैले कपड़ों को धारण कर रहे हो।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।

Thursday, December 1, 2022

लोगों को ऐसे समझिए

🌷 •┈✤आज का सुविचार✤┈• 🌷
   ⊰᯽⊱┈──╌❊╌──┈⊰᯽⊱

-----[ लोगों को ऐसे समझिए ]---

यदि कोई मामूली बातों में गुस्सा हो जाता है तो उसे प्यार की कमी है, यदि कोई असामान्य ढंग से खाना खा रहा है तो वह परेशान है, यदि कोई रोता नहीं है तो वह कमजोर है, यदि कोई व्यक्ति बेकार की बातों में भी हस्ता है तो वह अंदर से अकेला है, यदि किसी को छोटी बात में भी रोना अता है तो वह दिल का साफ और नेक इंसान है

            ━━━━❰・❉・❱━━━━
              🙏🏻 जय श्री कृष्णा 🙏🏻
                  🌞 सुप्रभात 🌞

Saturday, September 3, 2022

सतगुरू और संत के प्रेम की महिमा

सतगुरू और संत के प्रेम की महिमा

एक बार की बात है। कोई मालिक का प्यारा जो आंखों से अंधा था। चला गर्म रेत के रास्ते, नंगे पांव अपने सतगुरू से मिलने।
संत तो घट-घट की जानते हैं। उन्होेंने देखा कि कोई मेरा प्यारा आंखों से लाचार, गर्म रेत पर चल कर, लंबा रास्ता तय करके मेरे पास मुझे मिलने को आ रहा है।
संत कहां अपने प्यारे का दुख देख सकते हैं।
अपने बाकी शिश्यों से बोले के मैं अपने किसी प्यारे से मिलने जा रहा हूं।
जब सतगुरू अपने उस आंखों से लाचार प्यारे से मिलने पहुंचे, मिल कर बोले- तेरे प्यार के सदके! प्यारे मांग क्या चाहिये।

दास बोला- जी कुछ नहीं।
सतगुरू बोले- तेरा दिल बहुत बड़ा है।
अब दो चीजें मांग।
तब वो दास बोला- सच्चे पातशाह!
मेरी आंखे लौटा दो। ताकी मैं आप के दर्शन कर सकूं।

मालिक ने मेहर की।
दास को दिखाई देने लगा। (क्योंकि कहते हैं ना करता करे ना कर सके गुरू करे सो होये।)
दास ने जी भर दर्शन किये।
 तब सतगुरु ने कहा- अब दूसरी मांग मांगो।
 तो दास रो पड़ा, बोला- सच्चे पातशाह! मेरी ये आंखें वापिस ले लो।
सतगुरू बोले- प्यारे ये तुम क्या मांग रहे हो?
तब दास बोला- सच्चे पातशाह! मैं आप को देख कर कुछ और नहीं देखना चाहता।
सतगुरू जी ने दास को गले लगा लिया।
          

Sunday, January 16, 2022

जिंदगी का मज़ा खुलकर लो

जिंदगी का मज़ा खुलकर लो

मेरे एक मित्र ने अपनी बीवी की अलमारी से एक सुनहरे कलर का पेकेट निकाल कर उसमें रखी बेहद खूबसूरत सिल्क की साड़ी और उसके साथ की ज्वेलरी को एकटक देखा और कहा यह हमने 8-9 साल पहले लिया था, जब हम पहली बार न्युयार्क गए थे।

परन्तु उसने ये कभी पहनी नहीं क्योंकि वह इसे किसी खास मौके पर पहनना चाहती थी और इसलिए इसे बचा कर रखा था।

उसने उस पैकेट को भी दूसरे और कपड़ों के साथ अपनी बीवी की अर्थी के पास रख दिया |

उसने रोते हुए मेरी और देखा और कहा-- किसी भी खास मौके के लिए कभी भी कुछ भी बचा के मत रखना, जिंदगी का हर एक दिन खास मौका है, कल का कुछ भरोसा नहीं है |

उसकी उन बातों ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब मैं किसी बात की ज्यादा चिंता नहीं करता | अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता हूँ और काम का कम टेंशन लेता हूँ | मुझे अब समझ में आ चुका है कि जिंदगी जिंदादिली से जीने का नाम है |

डर-डर के, रुक-रुक के बहुत ज्यादा विचार करके चलने में समय आगे निकल जाता है और हम पिछड़ जाते हैं।

अब मैं कुछ भी बहुत संभाल के नहीं रखता, हर एक चीज़ का बिंदास और भरपूर उपयोग जी भर के करता हूँ।*

अब मैं घर के शो केस में रखी महँगी क्रॉकरी का हर दिन उपयोग करता हूँ...

अगर मुझे पास के मार्केट में या नज़दीकी माॅल में मूवी देखने नए कपड़े पहन के जाने का मन है, तो जाता हूँ।

अपने कीमती खास परफ्यूम को विशेष मौकों के लिए संभाल कर बचा के नहीं रखता, मैं उन्हें जब मर्जी आए तब उपयोग करता हूँ |

'एक दिन''किसी दिन''कोई ख़ास मौका' जैसे शब्द अब मेरी डिक्शनरी से गुम होते जा रहे हैं..।

अगर कुछ देखने, सुनने या करने लायक है,तो मुझे उसे अभी देखना सुनना या करना होता है।

अगर मुझे पता चले कि मेरा अंतिम समय आ गया है तो क्या मैं इतनी छोटी-छोटी चीजों को भी नहीं कर पाने के लिए अफसोस करूँगा।

नहीं...

हर दिन,हर घंटा,हर मिनट,हर पल विशेष है,खास है... बहुत खास है।

प्यारे दोस्तो..!
जिंदगी का लुत्फ उठाइए, आज में जिंदगी बसर कीजिये | क्या पता कल हो न हो | वैसे भी कहते हैं न कि कल तो कभी आता ही नहीं।

Tuesday, December 14, 2021

डॉक्टर jokes😂

 

पत्नी ICU में थी। पति का रो-रोकर बुरा हाल था। डॉक्टर बोला, ‘हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, पर वह कुछ बोल ही नहीं रही है। शायद कोमा में है। अब तो सब कुछ भगवान के हाथ में है।’ पति बोल उठा, ‘सिर्फ 40 की ही तो है अभी...’ तभी एक चमत्कार दिखा । ECG और धड़कन बड़ने लगी, पत्नी की उंगली हीली, होंठ हिले और आवाज आई " 36 की हुँ ।’😂😜😄

 

Monday, December 13, 2021

सर्जीकल और एयर......

 

सर्जीकल और एयर स्ट्राइक बवासीर के ऑपरेशन जैसा है... डॉक्टर कामयाब बताता है.... मरीज जगह दिखाने को तैयार नहीं ..... और बुद्धिमान स्थान देखना नही चाहते.......🤣🤣🤣🤣🤣

Sunday, December 12, 2021

हृदय में विराजमान भगवान

🌹हृदय में भगवान🌹 

यह घटना जयपुर के एक वरिष्ठ डॉक्टर की आपबीती है, जिसने उनका जीवन बदल दिया। वह हृदय रोग विशेषज्ञ  हैं। उनके द्वारा बताई प्रभु कृपा की कहानी के अनुसार:-

एक दिन मेरे पास एक दंपत्ति अपनी छः साल की बच्ची को लेकर आए। निरीक्षण के बाद पता चला कि उसके हृदय में रक्त संचार बहुत कम हो चुका है।

मैंने अपने साथी डाक्टर से विचार करने के बाद उस दंपत्ति से कहा - 30% संभावना है बचने की ! दिल को खोलकर ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ेगी, नहीं तो बच्ची के पास सिर्फ तीन महीने का समय है !

माता पिता भावुक हो कर बोले, "डाक्टर साहब ! इकलौती बिटिया है। ऑपरेशन के अलावा और कोई चारा नहीं है।

मैंने अन्य कोई विकल्प के लिए मना कर दिया
दंपति ने कहा आप ऑपरेशन की तैयारी कीजिये।"

सर्जरी के पांच दिन पहले बच्ची को भर्ती कर लिया गया। बच्ची मुझ से बहुत घुलमिल चुकी थी, बहुत प्यारी बातें करती थी। उसकी माँ को प्रार्थना में अटूट विश्वास था। वह सुबह शाम बच्ची को यही कहती, बेटी घबराना नहीं। भगवान बच्चों के हृदय में रहते हैं। वह तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे।

सर्जरी के दिन मैंने उस बच्ची से कहा, "बेटी ! चिन्ता न करना, ऑपरेशन के बाद आप बिल्कुल ठीक हो जाओगे।" बच्ची ने कहा, "डाक्टर अंकल मैं बिलकुल नहीं डर रही क्योंकि मेरे हृदय में भगवान रहते हैं, पर आप जब मेरा हार्ट ओपन करोगे तो देखकर बताना भगवान कैसे दिखते हैं ?" मै उसकी बात पर मुस्कुरा उठा।

ऑपरेशन के दौरान पता चल गया कि कुछ नहीं हो सकता, बच्ची को बचाना असंभव है, दिल में खून का एक कतरा भी नहीं आ रहा था। निराश होकर मैंने अपनी साथी डाक्टर से वापिस दिल को स्टिच करने का आदेश दिया।

तभी मुझे बच्ची की आखिरी बात याद आई और मैं अपने रक्त भरे हाथों को जोड़ कर प्रार्थना करने लगा, "हे ईश्वर ! मेरा सारा अनुभव तो इस बच्ची को बचाने में असमर्थ है, पर यदि आप इसके हृदय में विराजमान हो तो आप ही कुछ कीजिए।" 

मेरी आँखों से आँसू टपक पड़े। यह मेरी पहली अश्रु पूर्ण प्रार्थना थी। इसी बीच मेरे जूनियर डॉक्टर ने मुझे कोहनी मारी। मैं चमत्कार में विश्वास नहीं करता था पर मैं स्तब्ध हो गया यह देखकर कि दिल में रक्त संचार पुनः शुरू हो गया।

मेरे 60 साल के जीवन काल में ऐसा पहली बार हुआ था। आपरेशन सफल तो हो गया पर मेरा जीवन बदल गया। होश में आने पर मैंने बच्ची से कहा, "बेटा ! हृदय में भगवान दिखे तो नहीं पर यह अनुभव हो गया कि वे हृदय में मौजूद हर पल रहते हैं।

इस घटना के बाद मैंने अपने आपरेशन थियेटर में प्रार्थना का नियम निभाना शुरू किया। मैं यह अनुरोध करता हूँ कि सभी को अपने बच्चों में प्रार्थना का संस्कार डालना ही चाहिए।

यह कहानी एक ह्रदय रोग विशेषज्ञ की आत्म बीती है।


🙏🌷जय श्री राधे कृष्ण 🌷🙏

Friday, November 19, 2021

राजाभोज और व्यापारी

*राजाभोज और व्यापारी*

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यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि जैसा भाव हमारे मन मेे होता है वैसा ही भाव सामने वाले के मन में आता है। इस सबंध में एक ऐतिहासिक घटना सुनी जाती है जो इस प्रकार है-

एक बार राजा भोज की सभा में एक व्यापारी ने प्रवेश किया। राजा ने उसे देखा तो देखते ही उनके मन में आया कि इस व्यापारी का सबकुछ छीन लिया जाना चाहिए। व्यापारी के जाने के बाद राजा ने सोचा –

मै प्रजा को हमेशा न्याय देता हूं। आज मेेरे मन में यह अन्याय पूर्ण भाव क्यों आ गया कि व्यापारी की संपत्ति छीन ली जाये?

उसने अपने मंत्री से सवाल किया मंत्री ने कहा, “इसका सही जवाब कुछ दिन बाद दे पाउंगा, राजा ने मंत्री की बात स्वीकार कर ली। मंत्री विलक्षण बुद्धि का था वह इधर-उधर के सोच-विचार में सयम न खोकर सीधा व्यापारी से मिलने पहूंचा। व्यापारी से दोस्ती करके उसने व्यापारी से पूछा, “तुम इतने चिंतित और दुखी क्यों हो? तुम तो भारी मुनाफे वाला चंदन का व्यापार करते हो।”

व्यापारी बोला, “धारा नगरी सहित मैं कई नगरों में चंदन की गाडीयां भरे फिर रहा हूं, पर चंदन इस बार चन्दन की बिक्री ही नहीं हुई! बहुत सारा धन इसमें फंसा पडा है। अब नुकसान से बच पाने का कोई उपाय नहीं है।

व्यापारी की बातें सुन मंत्री ने पूछा, “क्या अब कोई भी रास्ता नही बचा है?”

व्यापारी हंस कर कहने लगा अगर राजा भोज की मृत्यु हो जाये तो उनके दाह-संस्कार के लिए सारा चंदन बिक सकता है।

मंत्री को राजा का उत्तर देने की सामग्री मिल चुकी थी। अगले दिन मंत्री ने व्यापारी से कहा कि, तुम प्रतिदिन राजा का भोजन पकाने के लिए एक मन ४० किलो चंदन दे दिया करो और नगद पैसे उसी समय ले लिया करो। व्यापारी मंत्री के आदेश को सुनकर बड़ा खुश हुूआ। वह अब मन ही मन राजा की लंबी उम्र होने की कामना करने लगा।

एक दिन राज-सभा चल रही थी। व्यापारी दोबारा राजा को वहां दिखाई दे गया। तो राजा सोचने लगा यह कितना आकर्षक व्यक्ति है इसे क्या पुरस्कार दिया जाये?

राजा ने मंत्री को बुलाया और पूछा, “मंत्रीवर, यह व्यापारी जब पहली बार आया था तब मैंने तुमसे कुछ पूछा था, उसका उत्तर तुमने अभी तक नहीं दिया। खैर, आज जब मैंने इसे देखा तो मेरे मन का भाव बदल गया! पता नहीं आज मैं इसपर खुश क्यों हो रहा हूँ और इसे इनाम देना चाहता हूँ!

मंत्री को तो जैसे इसी क्षण की प्रतीक्षा थी। उसने समझाया-

महाराज! दोनों ही प्रश्नों का उत्तर आज दे रहा हूं। जब यह पहले आया था तब अपनी चन्दन की लकड़ियों का ढेर बेंचने के लिए आपकी मृत्यु के बारे में सोच रहा था। लेकिन अब यह रोज आपके भोजन के लिए एक मन लकड़ियाँ देता है इसलिए अब ये आपके लम्बे जीवन की कामना करता है। यही कारण है कि पहले आप इसे दण्डित करना चाहते थे और अब इनाम देना चाहते हैं।

मित्रों, अपनी जैसी भावना होती है वैसा ही प्रतिबिंब दूसरे के मन पर पड़ने लगता है। जैसे हम होते है वैसे ही परिस्थितियां हमारी ओर आकर्षित होती हैं। हमारी जैसी सोच होगी वैसे ही लोग हमें मिलेंगे। यहीं इस जगत का नियम है – *हम जैसा बोते हैं वैसा काटते हैं…हम जैसा दूसरों के लिए मन में भाव रखते हैं वैसा ही भाव दूसरों के मन में हमारे प्रति हो जाता है!*
अतः *इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि हमेशा औरों के प्रति सकारात्मक भाव रखें।*
     ✴️✴️✴️✴️✴️
🙏🏻🙏🏻🙏

Thursday, November 18, 2021

गुरु नानक जयंती पर विशेष कहानी

¸.•*""*•.¸ 
*Զเधे_Զเधे*

🌹सुप्रभात जी🌹

एक गरीब, एक दिन एक सिक्ख के पास अपनी जमीन बेचने गया बोला सरदार जी मेरी 2 एकड़ जमीन आप रख लो। सिक्ख बोला, क्या कीमत है। गरीब बोला, --50 हजार रुपये। सिक्ख, थोड़ी देर सोच के ..., वो ही खेत जिसमे ट्यूबवेल लगा है।

गरीब --- जी। आप, मुझे 50 हजार से कुछ कम भी देगे, तो जमीन, आपको दे दूँगा।

सिक्ख ने आंखे बंद की 5 मिनिट सोच के... नही, मैं उसकी कीमत 2 लाख रुपये दूँगा।

गरीब... पर मैं 50 हजार ले रहाँ हूँ आप 2 लाख क्यो ??
सिक्ख बोला, तुम जमीन क्यों बेच रहे हो?

गरीब बोला, बेटी की शादी करना है। बच्चो की पढ़ाई की फीस जमा करना है। बहुत कर्ज है। मजबूरी है। इसीलिए मज़बूरी में बेचना है।पर आप 2 लाख क्यों दे रहे हैं?

सिक्ख बोला, *मुझे जमीन खरीदनी है किसी की मजबूरी नही खरीदनी* अगर आपकी जमीन की कीमत मुझें मालूम है। तो मुझें, आपके कर्ज, आपकीं जवाबदेही और मजबूरी का फायदा नही उठाना. मेरा "वाहेगुरू" कभी खुश नहीं होगा।
  
*ऐसी जमीन या कोई भी साधन, जो किसी की मजबूरियों को देख के खरीदे। वो घर और जिंदगी में, सुख नही देते, आने वाली पीढ़ी मिट जाती है।*
 
हे, मेरे मित्र, तुम खुशी खुशी, अपनी बेटी की शादी की तैयारी करो। 50 हजार की हम पूरा गांव व्यवस्था कर लेगें। तेरी जमीन भी तेरी रहेगी।
  
*मेरे, गुरु नानकदेव साहिब ने भी, अपनी बानी में, यही हुक्म दिया है* गरीब हाथ जोड़कर,आखों में नीर भरी खुशी-खुशी दुआयें देता चला गया।
 
ऐसा जीवन, हम भी बना सकते है।

*बस किसी की मजबूरी, न खरीदे। किसी के दर्द, मजबूरी को समझकर, सहयोग करना ही सच्चा तीर्थ है। ... एक यज्ञ है। ...सच्चा कर्म और बन्दगी है।

गुरु नानक जयंती...

*!! Զเधे Զเधे !!*

Wednesday, November 17, 2021

इस जीवन की चादर में

🌹इस जीवन की चादर में*
               *सांसों के ताने बाने हैं*'
           *दुख की थोड़ी सी सलवट है*
                  *सुख के कुछ फूल सुहाने हैं*. 
           *क्यों सोचे आगे क्या होगा*,
                  *अब कल के कौन ठिकाने हैं*,
      *ऊपर बैठा वो बाजीगर* ,
                *जाने क्या मन में ठाने है*
          *चाहे जितना भी जतन करे*
              *भरने का दामन तारों से*,
          *झोली में वो ही आएँगे*,
                 *जो तेरे नाम के दाने है*.""
   🌹👁❗👁🌹

Tuesday, November 16, 2021

आपका जन्म

🌿🔥 *इस पृथ्वी पर अरबो लोग हैं फिर भी आपका जन्म हुआ क्योकि आप का मूल्य बहुत है जो अरब लोग नही कर सकते वो दायित्व ऊपर वाले ने आपको दिये हैं इसीलिए आपका जन्म हुआ* 🔥🌿

🌿🔥 *जिस घड़ी से आपका मन अपने साथ साथ औरों के शुभ के लिए सोचना प्रारंभ कर दे समझ लो सुख शांति व समृद्धि आपके जीवन मे उसी समय से प्रवेश कर जाती है* 🔥🌿

🌿🔥 *ॐ गं गणपतये नमः* 🔥🌿
🌿🔥 *जय श्री महाकाल* 🔥🌿
🌿🔥 *हर हर महादेव* 🔥🌿
🌿🔥 *जय माता की* 🔥🌿

Monday, November 15, 2021

पता नहीं क्यों पापा हमेशा पीछे रह जाते हैं।

*पता नहीं क्यों पापा हमेशा पीछे रह जाते हैं।*

  * 1.  माँ 9 महीने पालती है पापा 25 साल पालते हैं, दोनों एक ही हैं, फिर भी पता नहीं क्यों पापा पीछे हैं।

  * 2.  माँ बिना तनख्वाह के परिवार के लिए काम करती है, पिता अपनी सारी तनख्वाह परिवार के लिए खर्च कर देता है, दोनों के प्रयास एक ही हैं, फिर भी पता नहीं क्यों पिता पीछे है।

  * 3.  माँ जो चाहती है पकाती है, बाप जो चाहता है खरीदता है, दोनों का प्यार एक ही है, लेकिन माँ के प्यार को सबसे अच्छा दिखाया जाता है।  पता नहीं पापा क्यों पीछे रह रहे हैं।*

  * 4.  जब आप फोन पर बात करते हैं, तो आप पहले माँ से बात करना चाहते हैं, अगर आप दुखी हैं तो आप 'माँ' कहते हैं और रोते हैं।  आप पिताजी को तभी याद करेंगे जब आपको आवश्यकता होगी, लेकिन पिताजी को कभी बुरा नहीं लगा कि आपने उन्हें दूसरी बार याद नहीं किया?  नाती-पोतों/बच्चों से प्यार पाने की बात आती है तो पता नहीं पापा क्यों पिछड़ रहे हैं।*

  * 5.  मम्मी के लिए रंग-बिरंगी साड़ियों और ढेर सारे कपड़ों से भरी अलमारी होगी, लेकिन पापा के कपड़े बहुत कम हैं, उन्हें अपनी जरूरतों की परवाह नहीं है, फिर भी पता नहीं क्यों पापा पीछे हैं।

  * 6.  माँ के पास सोने के बहुत सारे गहने हैं, लेकिन पिताजी के पास एक ही अंगूठी है जो उनकी शादी के दौरान दी गई थी।  फिर भी माँ कम गहनों की शिकायत कर सकती हैं और पिताजी नहीं करते।  पता नहीं क्यों पापा पीछे रह गए।*

  * 7.  परिवार को पालने के लिए पापा जी-जान से मेहनत करते हैं, लेकिन जब पहचान बनाने की बात आती है तो पता नहीं क्यों हमेशा पीछे रह जाते हैं।

  * 8.  माँ कहती है कि मुझे इस महीने कॉलेज की ट्यूशन फीस देनी है, कृपया त्योहार पर मेरे लिए साड़ी न खरीदें, जबकि पिताजी ने नए कपड़ों के बारे में सोचा भी नहीं है।  वे दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन वे अभी भी नहीं जानते कि पिताजी पीछे क्यों रह रहे हैं। *

  * 9.  जैसे-जैसे माता-पिता बड़े होते जाते हैं, बच्चे कहते हैं कि माँ घर के कामों में सबसे कम काम आती है, लेकिन वे कहते हैं कि पिताजी बेकार हैं। *

  * पिताजी पीछे हैं (या 'पीछे') क्योंकि वे परिवार की रीढ़ हैं।  इससे हम अपने दोनों पैरों पर खड़े हो पाते हैं।  शायद यही वजह है कि वो पीछे है....!!!*

  *सभी पिताओं को समर्पित*

Sunday, November 14, 2021

आज की प्रेरणा - Today's Inspiration

      *✨💧✨ आज की प्रेरणा ✨💧✨*
 
हमारी पहचान हमारे बार-बार किये गए कर्मों से ही होती है। श्रेष्ठता कोई कर्म नहीं है बल्कि हमारी आदत है।

*आज से हम* श्रेष्ठता को अपनी आदत बनाएं...

*✨💧✨ TODAY'S INSPIRATION ✨💧✨*

We are what we repeatedly do. Excellence, then, is not an act, but a habit.

*TODAY ONWARDS LET'S* make excellence our habit.

🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Friday, November 12, 2021

उम्रदराज न बनें

*उम्रदराज न बनें*:

*उम्र को दराज़ में रख दें*
*खो जाएं ज़िन्दगी में*
*मौत का इन्तज़ार न करें*

*जिनको आना है आए*
*जिसको जाना है जाए*
*पर हमें जीना है*
*ये न भूल जाएं*

*जिनसे मिलता है प्यार*
*उनसे ही मिलें बार बार*

*महफिलों का शौक रखें*
*दोस्तों से प्यार करें*
*जो रिश्ते हमें समझ सकें*
*उन रिश्तों की कद्र करें*

*बंधें नहीं किसी से भी*
*ना किसी को बँधने पर*
*मजबूर करें*
*दिल से जोड़ें हर रिश्ता*
*और उन रिश्तों से दिल से जुड़े रहें*

*हँसना अच्छा होता है*
*पर अपनों के लिये*
*रोया भी करें*
*याद आएं कभी अपने तो*
*आँखें अपनी नम भी करें*

*ज़िन्दगी चार दिन की है*
*तो फिर शिकवे शिकायतें*
*कम ही करें*
*उम्र को दराज़ में रख दें*
*उम्रदराज़ न बनें।*

कुछ बातें जीवन के लिए।‌ Some thoughts about Life

♦️ *रिश्ते और रास्ते*
       *तब ख़त्म हो जाते हैँ*
        *जब पाँव नहीं*
        *दिल थक जाते है.....*

 ♦️ *कृतज्ञता व्यक्त करना और क्षमा माँगना*
        *दो गुण जिस व्यक्ति के पास है*
       *वो सबके क़रीब... और ...*
       *सबके लिए प्रिय होता है ...*

♦️ *कुछ बातों के मतलब और*
       *कुछ मतलब की बातें..*
       *जब व्यक्ति दोनों को*
       *समझने लगता है*
       *सच में तभी जिंदगी सुलझी*
       *हुई नज़र आने लगती है..!!*

♦️ *मौन किसी मानव की*
       *कमजोरी नहीं* ....
       *उसका बड़प्पन होता है*
       *वरना जिस को सहना आता है*
       *उसको कहना भी आता है*

♦️ *परमात्मा सभी को एक ही*
       *मिट्टी से बनाता है*
       *...बस फर्क इतना है कि....*
       *कोई बाहर से खूबसूरत होता है*
       *.... तो कोई भीतर से...*

          
   🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

     *🙏🏻🌄शुभ प्रभात🌄🙏🏻*

   *_🙏🏻🌹जय श्री श्याम🌹🙏🏻_*

Saturday, October 23, 2021

धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता - सत्य कथा

अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद नेल्सन मांडेला अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए।सबने अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया और खाना आने का इंतजार करने लगे। उसी समय मांडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतजार कर रहा था। 
मांडेला ने अपने सुरक्षाकर्मी से कहा कि उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ खाना आने के बाद सभी खाने लगे, वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा , पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे। खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर रेस्तरां से बाहर निकल गया । 

उस आदमी के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था, खाते वख़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे और वह ख़ुद भी कांप रहा था । मांडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है । वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे कैद रखा गया था । जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती थीं और मै कराहते हुए पानी मांगता था तो ये मेरे ऊपर पेशाब करता था ।

मांडेला ने कहा मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ शायद वैसा ही व्यवहार करूंगा । पर मेरा चरित्र ऐसा नहीं है । मुझे लगता है बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है ।वहीं धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता हमें विकास की ओर ले जाती है ।